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गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः
गुरु साक्षात पर-ब्रह्मा तत्स्मै श्री गुरवे नमः
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आज के वचन


जय श्री सच्चिदानंद जी

संत अवतार (भाग-)

उस रचियता ने सृष्टि के कार्य प्रबंध को एक विशेष नियम में बांध रखा है। सृष्टि में कोई वस्तु भी अनियमित नहीं है। युग पर युग व्यतीत होते जा रहे हैं, समय ने कितनी ही क्रांतियाँ देख ली है परन्तु इश्वर और मालिक के नियमो तथा सिद्धांतो में तनिक भी परिवतन नहीं हुआ। बड़ी सफलता पूर्वक प्रक्रति का कार्य प्रबंध जैसे चलता था, बराबर चल रहा है और चलता जायेगा। यह न बदला है और न ही बदलेगा।

सृष्टि कर्ता और सूत्रधार प्रभु यदि ऐसा न करते तो असंख्य नक्षत्रो से भरे इस महा आकाश में हमारी प्रथ्वी किसी दुसरे नक्षत्र से टकरा कर न जाने कब की भस्म हो गयी होती। चंद्रमा पर पहुँचने की दोड़ में व्याकुल हुए वैज्ञानिक ज्यों ज्यों प्रकृति के नए नए रहस्यों को जानते जाते हैं, त्यों त्यों दांतों में उँगलियाँ दबाये प्रकृति के नियम और उसके सिद्धांतों को देख देख आश्चर्य चकित होकर सहसा यह पुकार उठने पर विवश हो जाते हैं की विज्ञानं (Science) और टैक्नोलोजी (Technology) की इतनी उन्नति के होने पर भी हम अपने किसी काम में वैसा अनुशासन और सुप्रबंध नहीं ला पाए जो अनदेखे अज्ञात हाथों ने इतनी विस्तृत और अथाह सृष्टि रचना में उत्पन्न कर दिया था।


जय सच्चिदानंद जी

(सत्संग नगरी)