Prem aur Jeevan


जय श्री सचिदानंद जी 

प्रेम में वस्तुएं भी जीवित हो जाती हैं।  पत्थर और वृक्ष तुमसे बातें करने लगते हैं।  सूर्य, चंद्रमा, यह सारी सृष्टि सजीव हो उठती है।  जब प्रेम नहीं होता तो जीवित लोग भी वस्तु बन जाते हैं। 

जय श्री सचिदानंद जी
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Shri Nangli Sahib Darbar