Sant Vaani - 96 (Knowledge - ज्ञान)


जय श्री सच्चिदानंद जी 

 जो व्यक्ति सदगुरु कि ज्ञान-सीढ़ी से उतर जाता है और उनके सत्योपदेश से विमुख हो जाता है, उसको दुर्वासना रुपी काल घसीटकर संसार में रगड़ता है । उसकी कोई रक्षा नहीं कर सकता । संत कबीर जी कहते है लेने के लिए अर्थात सुमिरण के लिए सदगुरु का नाम श्रेष्ठ है और देने के लिए यानि दान करने के लिए अन्नदान श्रेष्ठ | संसार सागर से तरने के लिए विनम्रता श्रेष्ठ है और डूब मरने के लिए अभिमान | आज कल नामदान कि बख्शीश के बाद भजन सिमरन से कोई लेना देना नहीं लेकिन एक बात हमेशा याद रखें बिना भजन सिमरन के कुछ भी संभव नहीं अगर आप को कोई गलतफहमी हो तो दिमाग से निकाल बाहर कर देना सिर्फ नामदान से ही मुक्ति नहीं मिल सकती इसके लिए आपको कड़ी मेहनत करनी होगी भजन सिमरन का अभ्यास करना पड़ेगा तब जाकर मुक्ति मिलेगी हर वेले हर समय दुःख में सुख उस मालिक का शुकराना भजन सिमरन के रूप में करना चाहिए तब जाकर आप सच्चे गुरमुख बनोगे भाई बाकी आप समझें जी नाम की कमाई करने के लिए हमेशा तीन बातों को याद रखना चाहिए। एक गफ़लत या आलस नहीं करना है दूसरे दुनीयां में से अपने ख़याल को निकालने की कोशिश करनी चाहिए तीसरे नाम की कमाई को अपने अन्दर हज़म करना है। 

जय श्री सच्चिदानंद जी 

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