उत्कृष्ट उदाहरण - Excellent example


जय श्री सच्चिदानंद जी 

एक बार एक शिष्य ने अपने गुरू से पूछा की गुरूदेव ! सत्संग सुनने इतने लोग आते हैं, क्या सभी लोग प्रभु के दर्शन कर पाते है ?

गुरू ने मुस्कराकर कहा, एक जमीन होती वहाँ कुछ भी नही उगता. दुसरी जमीन जहॉ घास तो उघती है मगर सुखकर जल जाती है. और तीसरी जमीन खेती कहते है,  वहॉ जो उगाओ वही पैदा होता है.  लेकीन उसके लिये
वक्त पर पानी और धूप की जरूरत होती है.

ठीक इसी तरह जो पर्मारथ की राह पे नही चलते वो बंजर जमीन की तरह है.  जो सत्संग मे आते तो है मगर ध्यान नही देते वो अमल नही करते हैं, वो सुखी घास की तरह हैं पैदा तो होती है मगर किसी काम की नही।

जो सत्संग मे आते है अपने जीवन मे अमल करते है और प्रभु के गुणगान गाते है, वो खेती की तरह जो उगाओ
पैदा होता है।  वही इंसान प्रभु के दर्शन कर सकता है।

जय  सच्चिदानंद जी 
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Shri Nangli Sahib Darbar